Monday, November 18, 2019

vinshar ( Bindeswar Mahadev Yatra 17/10/2019)


बिन्देश्वर मन्दिर fou”kj  egknso 

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बिंदेश्वर महादेव में जल मंगल (एक प्राकृतिक जल स्रोत)
प्राकृतिक जल स्रोत मंदिर में कुछ ताजे पानी के मंगल हैं जिन पर भक्तों ने भगवान बिंदेश्वर की दृष्टि से पहले पवित्र स्नान किया था। इन मंगलों के इतिहास मंदिर के इतिहास के समान ही संदेह में हैं। ये मंगल कई सदियों तक लगातार बह रहे हैं।

Natural Water Mangar

बिन्देश्वर मन्दिर उत्तराखंड के थलीसैण ब्लॉक, जिला पौड़ी गढ़वाल के पट्टी चौथान




में स्थित है। इसे बिनसर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय भाषा में बिनसर का अर्थ है अति सुबह या ब्रह्म मुहूर्त यानी बिनसर बेला।

समुंद्रतल से लगभग 2480 मीटर की ऊँचाई पर स्थित बिनसर मन्दिर का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। बिनसर महादेव मन्दिर के लगभग 70 फुट ऊँचे मुख्य मन्दिर के बाहर नागपाश युक्त गणेश मूर्ति, हरिगौरी, महिषासुर मर्दनी और नारायण की प्रतिमा हैं । मन्दिर के भीतर स्थान को बिन्दी कहा जाता है जहा मुख्य लिंग के अलावा बहुत सी अन्य मूर्तियां भी हैं। उसी के नीचे एक कुण्ड भी है जो अब ढक दिया गया है इस कुण्ड का पानी दो किलोमीटर दूर सुन्दरगांव के पास एक झरने में पहुँचता है। कुण्ड में पड़े चावल के दाने दो किलोमीटर नीचे झरने में मिलना इसका प्रमाण है। हर साल बैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है । ढोल-दमो व रणसिंगा की भक्तिमय संगीत की गूंज के बीच निःसंतान महिलाएं रातभर हथेली में जलता दीपक रखकर भगवान महादेव से संतान के लिए प्रार्थना करती हैं। माना जाता है कि राजा पिरथु ने अपने पिता बिंदु की याद में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसीलिए इस मन्दिर को बिन्देश्वर मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है । कुछ मान्यताओं के मुताबिक यहां पांडवों ने कुछ समय व्यतीत किया था और यहां भैरवनाथ की स्थापना की थी।

बिनसर मन्दिर के दर्शन करने में आपको ट्रेकिंग का भरपूर मौका मिलता है । कोई भक्तिभाव से बिनसर महादेव के दर्शन को आता है तो कोई रमणीय पर्वतों के बीच चन्द पल बिताने। यह स्थल चारों ओर कहीं देवदार, रांगा, खरसू तो कहीं कुकुम, बांज-बुराँस आदि पेड़-पौधों से घिरा हुआ है। जहां एक ओर शहरी भीड़भाड़ से दूर मानसिक थकान मिटाने के लिए पर्यटक इस रमणीक स्थल को देखने यहां चले आते हैं वहीं दूसरी ओर मनमोहित करने वाले पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों जैसेआउलऐट,मिनिवेट, बुलबुल, सारिका, नीलकंठ आदि को भी देखने प्रकृति प्रेमी यहाँ आने को लालायित रहते हैं। आजकल बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति की अथक प्रयास व योगदान से बिनसर मन्दिर का नवनिर्माण कार्य चल रहा है।

Friday, November 15, 2019

MERI BADRINATH YATARA 9/11/2019












Ye Meri Shri Badrinath Ki Pehli Yatra Thi jo Bhaut Sukhad Or Santi Purwak Rahi Mere Stha A.S. Purohit G mere stha Me the Ye yatra hum logo ne 3 Din Me Puri Ki Pehali Raat Hum Joshimath me ruke or Dushri Raat Hum chamoli me ruke Or tishre din hum wapas Ghar Aa gaye